Friday, December 30, 2016

Beautiful Depiction of Dawn (Usha) in Tapasvini Kavya/Dr. HKMeher

Beautiful Depiction of Dawn (Usha)  
in Tapasvini-Kavya of Poet Gangadhar Meher
*
(Extracted from Tri-lingual Translations of Tapasvini
By  Dr. Harekrishna Meher) 

= = = = = = = = = = =
Original Odia Poem from Canto-IV
composed in mellifluous Chokhi-Raga :   
= = = = = = = = = = =
मङ्गळे अइला उषा   
बिकच-राजीब-दृशा
जानकी-दर्शन-तृषा 
हृदये बहि      
कर-पल्लबे नीहार-     
मुक्ता धरि उपहार
सतीङ्क बास बाहार  
प्राङ्गणे रहि  ।
कळकण्ठ-कण्ठे कहिला,
दरशन दिअ सति  ! राति पाहिला ॥ ()
*
अरुण कषाय बास     
कुसुम-कान्ति-बिकाश
प्रशान्त रूप बिश्वास 
दिअन्ति मने  ।  
केउँ य़ोगेश्वरी आसि    
मधुर भाषे आश्वासि
डाकुछन्ति दुःखराशि   
उपशमने  ।
देबा पाइँ नब जीबन,
स्वर्गुँ कि ओह्लाइछन्ति  मर्त्त्य भुबन ॥ ()  
*
समीर सङ्गीत गाए   
भ्रमर बीणा बजाए  
सुरभि नर्त्तने थाए   
उषा-निदेशे  ।  
कुम्भाटुआ होइ भाट   
आरम्भिला स्तब पाठ
कळिङ्ग अइला पाट-   
मागध बेशे  ।  
लळित मधुरे कहिला,
उठ सती-राज्य-राणि !  राति पाहिला ॥’ ()
*
= = = = = = = = = = = = = = 
Hindi Translation
= = = = = = = = = = = = = = 
समंगल आई सुन्दरी 
प्रफुल्ल-नीरज-नयना उषा, 
हृदय में ले गहरी 
जानकी-दर्शन की तृषा  ।  
नीहार-मोती उपहार लाकर पल्लव-कर में, 
सती-कुटीर के बाहर 
आंगन में खड़ी होकर  
बोली कोकिल-स्वर में,   
दर्शन दो, सती अरी  ! 
बीती  विभावरी ॥’ (१) 
*
अरुणिमा कषाय परिधान,  
सुमनों की चमकीली मुस्कान  
और प्रशान्त रूप मन में जगाते विश्वास : 
आकर कोई योगेश्वरी 
बोल मधुर वाणी सान्त्वनाभरी 
सारा दुःख मिटाने पास 
कर रही हैं आह्वान  ।  
मानो स्वर्ग से उतर  
पधारी हैं धरती पर  
करने नया जीवन प्रदान ॥ (२) 
*
गाने लगी बयार 
संगीत  तैयार   
वीणा बजाई भ्रमर ने,  
सौरभ लगा नृत्य करने  
उषा का निदेश मान  ।  
कुम्भाट भाट हो करने लगा स्तुति गान ।   
कलिंग आया पट्टमागध बन,   
बोला बिखरा ललित मधुर स्वन,    
उठो  सती-राज्याधीश्वरि ! 
बीती  विभावरी ॥’ (३) 
*
= = = = = = = = = = = = = = =   
English Translation
= = = = = = = = = = = = = = =    
Auspiciously came
Usha, the blooming lotus-eyed dame,  
in her heart cherishing keenly  
thirst for a vision
of the virtuous Janaki.  
Bearing dew-pearls as presentation  
in her hands of leafage,  
standing forward
in the outer courtyard
of Sita’s cottage,  
in cuckoo’s tone spake she,  
‘O Chaste Lady !
Deign to give your sight.  
Dawned the night.’ (1)  
*
The saffron costume  
of auroral shine,  
flowers’ smiling bloom  
and tranquil mien  
make a room  
in the mind to presume :  
Some goddess of yoga reaching the place,  
by sweet words giving solace  
calls to render relief  
from pangs of grief.  
From heaven on earth as if  
has descended to bestow a new life.  (2)  
*
Musical tune Zephyr sang swinging.  
Black Bee played on lute charming.  
By Usha’s bidding, in dance  
rapt remained Fragrance.  
Kumbhatua bird as a royal bard  
began to eulogize forward.  
As the panegyrist premier
Kalinga bird appeared there   
and spake in voice gracefully sweet,
‘Wake please,
O Queen of the empire of chaste ladies !  
Dawned the night.’ (3)  
*  
= = = = = = = = = = = = = = = 
Sanskrit Translation
= = = = = = = = = = = = = = = 
मङ्गलं समागता सौम्याङ्गना
उषा व्याकोषारविन्द-लोचना
वैदेही-दर्शनाभिलाषं वहन्ती स्वहृदये ।
पल्लव-कर-द्वये
नीहार-मौक्तिक-प्रकरोपहारं दधाना
सती-निलय-बहिरङ्गणे विद्यमाना
अभाषत कोकिल-कण्ठ-स्वना सूनरी,
दर्शनं देहि सति ! प्रभाता विभावरी ॥ (१)
*
अरुण-काषायाम्बरम्,
स्मितं सुमनसां विकस्वरम्,
प्रशान्त-रूपं च स्वान्ते जनयन्ति प्रत्ययम् :
काऽपि योगेश्वरी तत्रागत्य स्वयम्
सुमधुर-वचनैः सान्त्वनां प्रदाय
समाकारयति दुःखराशि-प्रशमनाय ।
नवीन-जीवन-दानार्थं सा ध्रुवम्
विद्यते त्रिदिव-भुवनादवतीर्णा भुवम् ॥ (२)
*
सङ्गीतं गायति स्म समीरणः,
भृङ्गो वीणा-वादन-प्रवणः ।
सुरभिरवर्त्तत नर्त्तन-तन्मया
उषाया अनुज्ञया  ।
वैतालिको भूत्वा कुम्भाट-विहङ्गः  
प्रारभत स्तुति-पठनम्  ।  
समागतो मागध-मुख्य-वेशः कलिङ्गः
प्रोवाच सुललित-मधुर-स्वनम्,
उत्तिष्ठ, सती-राज्याधीश्वरि !  
प्रभाता विभावरी ॥ (३)
= = = = = = = = = = = = = 

Ref : Complete Hindi-English-Sanskrit Versions of Tapasvini Kavya :

* * * 

No comments:

Post a Comment